इस उपन्यास में मारवाड़ राज्य की एक दासी की पासवान गुलाबराय की कथा है जो मारवाड़ की रानी बनकर चालीस वर्षों तक मराठों से टक्कर लेती रही तथा जिसकी सेनाओं ने महादजी सिंधिया जैसे पराक्रमी मराठा सेनापति को पराजय का स्वाद चखाया।
हिन्दी साहित्य में हम्मीर रासो नाम से तीन अलग-अलग रचनाएँ मिलती हैं, जिनके रचयिता, भाषा और काल भिन्न-भिन्न हैं।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
13वीं शताब्दी के अंत में...