पश्चिमी मालवा का वर्धन राजवंश और राजस्थान की संप्रभुता

पश्चिमी मालवा का वर्धन राजवंश छठी शताब्दी ईस्वी के पूर्वार्ध में राजस्थान के इतिहास से जुड़ गया था। ऐसी स्थिति में राजस्थान के समक्ष...

झिलाय दुर्ग

रियासती काल में झिलाय आमेर के कच्छवाहा राजवंश की प्रमुख जागीर थी। इसे छोटी आमेर भी कहा जाता था।

टहला दुर्ग

भाटी गोयन्ददास का मारवाड़ की राजनीति में महत्व

भाटी गोयन्ददास (गोविन्ददास) ने साधारण राजपूत परिवार में जन्म लिया किंतु अपनी स्वामिभक्ति, शौर्य एवं बुद्धि-चातुर्य के बल पर वह मारवाड़ राज्य (Princely State...
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आमेट जागीर में उत्तराधिकार की समस्या और ब्रिटिश नीति

यह आलेख ब्रिटिश शासन काल में मेवाड़ राज्य की आमेट जागीर में हुए उत्तराधिकार संबंधी विवाद पर आधारित है जिसके माध्यम से यह समझने...

मेवाड़ भील कोर

मेवाड़ भील कोर की स्थापना ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा मेवाड़ के महाराणा की सहमति पर की गई थी। इससे मेवाड़ राज्य भीलों के उपद्रवों...

Maharana Mokal and his Date of Accession

Maharana Mokal ascended the throne of Mewar in V.S. 14761 /1419 A D. after the death of his father Maharana Lakha. Former historians disagreed...

बड़ी सादड़ी के राजराणा

बड़ी सादड़ी के राजराणा मेवाड़ के 16 प्रमुख रजवाड़ों में स्थान रखते थे। बड़ी सादड़ी दुर्ग मेवाड़ राज्य के प्रमुख दुर्गों में से था।...

महाराणा प्रताप के साथी

आज संसार में जिस श्रद्धा एवं विश्वास के साथ महाराणा प्रताप (ई.1540-ई.1597) का स्मरण किया जाता है, उसे देखकर ऐसा लगता है कि जिस...

भाटी गोयन्ददास का मारवाड़ की राजनीति में महत्व

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नाथ सम्प्रदाय का मारवाड़ की राजनीति में वर्चस्व

नाथ सम्प्रदाय का मारवाड़ की राजनीति में वर्चस्व उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वाद्ध की एक आश्चर्यजनक और महत्वपूर्ण घटना थी। राजपूताना की किसी अन्य रियासत...

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