जोधपुरा उत्खनन: स्तर विन्यास और मृदभांड अनुक्रम

यह आलेख राजस्थान सरकार के पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग द्वारा जयपुर जिले के जोधपुरा नामक पुरास्थल पर किए गए उत्खनन के निष्कर्षों और उनके...

झिलाय दुर्ग

रियासती काल में झिलाय आमेर के कच्छवाहा राजवंश की प्रमुख जागीर थी। इसे छोटी आमेर भी कहा जाता था।

टहला दुर्ग

जोधपुर राजपरिवार में सतीप्रथा

जोधपुर राजपरिवार में सतीप्रथा हिन्दू राजवंशों में पति के मरने पर पत्नी के सती होने की परम्परा पौराणिक काल से ही चली आ रही थी।...
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आमेट जागीर में उत्तराधिकार की समस्या और ब्रिटिश नीति

यह आलेख ब्रिटिश शासन काल में मेवाड़ राज्य की आमेट जागीर में हुए उत्तराधिकार संबंधी विवाद पर आधारित है जिसके माध्यम से यह समझने...

मेवाड़ भील कोर

मेवाड़ भील कोर की स्थापना ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा मेवाड़ के महाराणा की सहमति पर की गई थी। इससे मेवाड़ राज्य भीलों के उपद्रवों...

Maharana Mokal and his Date of Accession

Maharana Mokal ascended the throne of Mewar in V.S. 14761 /1419 A D. after the death of his father Maharana Lakha. Former historians disagreed...

बड़ी सादड़ी के राजराणा

बड़ी सादड़ी के राजराणा मेवाड़ के 16 प्रमुख रजवाड़ों में स्थान रखते थे। बड़ी सादड़ी दुर्ग मेवाड़ राज्य के प्रमुख दुर्गों में से था।...

महाराणा प्रताप के साथी

आज संसार में जिस श्रद्धा एवं विश्वास के साथ महाराणा प्रताप (ई.1540-ई.1597) का स्मरण किया जाता है, उसे देखकर ऐसा लगता है कि जिस...

जोधपुर राजपरिवार में सतीप्रथा

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भाटी गोयन्ददास का मारवाड़ की राजनीति में महत्व

भाटी गोयन्ददास (गोविन्ददास) ने साधारण राजपूत परिवार में जन्म लिया किंतु अपनी स्वामिभक्ति, शौर्य एवं बुद्धि-चातुर्य के बल पर वह मारवाड़ राज्य (Princely State...

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