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राजस्थान में सूखे की समस्या और समाधान

राजस्थान में सूखे की समस्या सदियों पुरानी है। इस आलेख में राजस्थान में सूखे और अकाल की समस्या के कारण, प्रभाव और पारंपरिक जल...

झिलाय दुर्ग

रियासती काल में झिलाय आमेर के कच्छवाहा राजवंश की प्रमुख जागीर थी। इसे छोटी आमेर भी कहा जाता था।

टहला दुर्ग

मेवाड़ भील कोर

मेवाड़ भील कोर की स्थापना ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा मेवाड़ के महाराणा की सहमति पर की गई थी। इससे मेवाड़ राज्य भीलों के उपद्रवों...

मेवाड़ भील कोर

मेवाड़ भील कोर की स्थापना ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा मेवाड़ के महाराणा की सहमति पर की गई थी। इससे मेवाड़ राज्य भीलों के उपद्रवों...

Maharana Mokal and his Date of Accession

Maharana Mokal ascended the throne of Mewar in V.S. 14761 /1419 A D. after the death of his father Maharana Lakha. Former historians disagreed...

बड़ी सादड़ी के राजराणा

बड़ी सादड़ी के राजराणा मेवाड़ के 16 प्रमुख रजवाड़ों में स्थान रखते थे। बड़ी सादड़ी दुर्ग मेवाड़ राज्य के प्रमुख दुर्गों में से था।...

महाराणा प्रताप के साथी

आज संसार में जिस श्रद्धा एवं विश्वास के साथ महाराणा प्रताप (ई.1540-ई.1597) का स्मरण किया जाता है, उसे देखकर ऐसा लगता है कि जिस...

सांगानेर दुर्ग

जिला मुख्यालय भीलवाड़ा से चार किलोमीटर दूर स्थित सांगानेर दुर्ग का निर्माण अठारहवीं शताब्दी ईस्वी में मेवाड़ के महाराणा संग्रामसिंह द्वितीय (ई.1711-34) ने करवाया...

कुवलयमाला में प्रयुक्त भाषाएँ

प्राकृत साहित्य के विशाल भंडार में जैन आचार्य उद्योतन सूरि द्वारा चंपू काव्य शैली (गद्य और पद्य मिश्रण) में रचित 'कुवलयमाला' (8वीं शताब्दी, रचना...

कुवलयमाला: आचार्य उद्योतनसूरि का प्राकृत ग्रंथ

भारतीय साहित्य में अनेक ग्रंथ ऐसे हैं जो केवल धार्मिक या ऐतिहासिक महत्व ही नहीं रखते, अपितु समाज और संस्कृति की गहरी झलक भी...
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