Sunday, March 3, 2024
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महाराणा संग्रामसिंह द्वारा गुजरात और दिल्ली के विरुद्ध कार्यवाही

24 मई 1503 को गुहिल वंश का सबसे प्रतापी, वीर और प्रभावशाली महाराणा संग्रामसिंह चित्तौड़ की गद्दी पर सुशोभित हुआ। इतिहास में उसे राणा सांगा के नाम से जाना जाता है। वह अपने युग का सबसे प्रबल हिन्दू शासक था। उसकी सेवा में अनेक हिन्दू राजा रहते थे। कई मुसलमान अमीर तथा शहजादे उसकी शरण में रहते थे। जिस समय वह मेवाड़ की गद्दी पर बैठा, उस समय दिल्ली में सिकंदर लोदी, गुजरात में महमूदशाह बेगड़ा और मालवा में नासिरशाह खिलजी शासन करता था। इस प्रकार सांगा तीन ओर से बड़े शत्रुओं से घिरा हुआ था।

गुजरात के सूबेदारों के विरुद्ध कार्यवाही

महाराणा सांगा ने आजीवन उत्तर भारत की राजनीति में सक्रिय भूमिका का निर्वहन किया तथा अपने शत्रुओं से मोर्चा लिया। महमूदशाह बेगड़ा के बाद मुजफ्फरशाह गुजरात का सुल्तान हुआ। मुजफ्फरशाह की आज्ञा से, ईडर राज्य के अल्पवयस्क राजा रायमल को, उसके चाचा भीम ने ईडर से निकाल कर ईडर राज्य पर अधिकार कर लिया। रायमल भागकर मेवाड़ आ गया।

महाराणा ने उसे अपनी शरण में रख लिया तथा उससे अपनी पुत्री का विवाह कर दिया। भीम के बाद उसका पुत्र भारमल ईडर की गद्दी पर बैठा। इधर जब रायमल वयस्क हो गया तब उसने (रायमल ने) महाराणा सांगा की सहायता से ईडर पर आक्रमण किया तथा भारमल को ईडर से निकालकर, ईडर राज्य पर पुनः अधिकार कर लिया। 

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जब गुजरात के सुल्तान मुजफ्फरशाह को यह बात ज्ञात हुई तो वह बड़ा क्रोधित हुआ। उसने अहमदनगर के अमीर निजामुल्मुल्क को आज्ञा दी कि वह रायमल को ईडर से निकाल दे, राणा को यह अधिकार नहीं है कि वह रायमल को ईडर की गद्दी पर बैठाये। इस पर निजामुल्मुल्क ने रायमल पर आक्रमण किया।

रायमल ईडर छोड़कर पहाड़ों में चला गया तथा अपने पीछे आये निजामुल्मुल्क को बुरी तरह परास्त कर दिया। मुजफ्फरशाह ने निजामुल्मुल्क के स्थान पर जहीरुल्मुल्क को भेजा। रायमल ने जहीरुल्मुल्क को मार डाला।

मुजफ्फरशाह ने नस्रतुल्मुल्क को कार्यवाही करने के लिये लिखा किंतु रायमल के सामने उसकी दाल भी नहीं गली। इस पर मुजफ्फरशाह  ने मलिक हुसैन बहमनी (मुबारिजल्मुल्क) को भेजा। उसने रायमल को ईडर से निकाल कर ईडर पर अधिकार कर लिया। इस पर मुजफ्फरशाह ने मुबारिजल्मुल्क को ईडर का हाकिम नियुक्त कर दिया।

जब महाराणा सांगा को ज्ञात हुआ कि मुबारिजल्मुल्क ने रायमल को ईडर से निकालकर ईडर पर अधिकार कर लिया है तो सांगा ने विशाल सेना लेकर ईडर पर चढ़ाई की। मार्ग में वागड़ का राजा उदयसिंह भी महाराणा के साथ हो गया। मुबारिजल्मुल्क भागकर अहमदनगर के किले में बंद हो गया।

महाराणा ने अहमदनगर को घेरकर किले के द्वार तोड़ दिये तथा किले के भीतर बंद समस्त मुस्लिम सेना को मार दिया। मुबारिजल्मुल्क किले के पीछे की खिड़की से निकलकर नदी के पार भाग गया तथा वहाँ पर महाराणा के विरुद्ध मोर्चाबंदी करने लगा।

इस बात का पता लगते ही महाराणा उस पर टूट पड़ा। मुबारिजल्मुल्क बुरी तरह घायल हुआ तथा कई मुस्लिम सरदार मारे गये। महाराणा ने अहमदनगर को लूट लिया तथा बड़नगर को लूटने के लिये आगे बढ़ा। इस पर बड़नगर के ब्राह्मणों ने उससे अभयदान की प्रार्थना की जिसे स्वीकार कर वह वीसलनगर की ओर बढ़ा। महाराणा ने वीसलनगर के हाकिम को मारकर नगर को लूटा। रायमल को फिर से ईडर की गद्दी पर बैठाकर महाराणा चित्तौड़ को लौट आया।

दिल्ली के सुल्तान के विरुद्ध कार्यवाही

 सांगा ने सिकंदर लोदी के समय से ही दिल्ली के क्षेत्र, अपने राज्य में सम्मिलित करने आरम्भ कर दिये थे किंतु सिकंदर लोदी, सांगा के विरुद्ध कुछ नहीं कर सका। ई.1517 में सिकंदर लोदी की मृत्यु होने पर उसका पुत्र इब्राहीम लोदी, दिल्ली का सुल्तान बना। उसने उसी वर्ष सांगा पर आक्रमण किया। सांगा ने हाड़ौती की सीमा पर स्थित खातोली गांव के निकट इब्राहीम लोदी की सेना में कसकर मार लगाई।

इब्राहीम लोदी तो युद्ध क्षेत्र से जान बचाकर भाग गया किंतु उसका एक शहजादा, सांगा के हाथों पकड़ा गया जिसे बाद में सांगा ने छोड़ दिया। इस युद्ध में सांगा का बायां हाथ तलवार से कट गया और घुटने में एक तीर लगने से वह सदा के लिये लंगड़ा हो गया।  ई.1518 में सुल्तान इब्राहीम लोदी की सेना ने पुनः मेवाड़ पर आक्रमण किया। दोनों पक्षों में धौलपुर के निकट लड़ाई हुई।

महाराणा ने सुल्तान की सेना को युद्ध के मैदान से भाग जाने पर विवश कर दिया तथा भागती हुई सेना का बयाना तक पीछा किया। इस युद्ध के परिणाम स्वरूप मालवा का कुछ भाग, दिल्ली सल्तनत से निकल कर मेवाड़ राज्य को मिल गया।

– डॉ. मोहनलाल गुप्ता

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