डिंगल भाषा के साहित्य को समझने के लिए विविधि रचनाकारों ने अलग-अलग कालखण्डों में अनेक प्रकार के ‘ डिंगल कोश ‘ तैयार किए। यहाँ कुछ प्रसिद्ध डिंगल कोश तथा उनके रचनाकारों की एक संक्षिप्त सूची दी जा रही है। डिंगल भाषा में ‘कोश’ को ‘कोष’ लिखा जाता है किंतु हिन्दी भाषा में ‘शब्दकोश’आदि के साथ ‘कोश’ शब्द का प्रयोग किया जाता है। हिन्दी भाषा में कोष का अर्थ खजाना होता है।
वर्तमान समय में यद्यपि राजस्थानी भाषा को बोलने वालों की संख्या तो बहुत अधिक है तथापि राजस्थानी टैक्स्ट पढ़ने वालों की संख्या बहुत कम है। इस कारण डिंगल कोशों के प्रयोग का प्रचलन बहुत कम हो गया है। फिर भी विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा को विषय के रूप में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए डिंगल कोश बहुत उपयोगी हैं।
पर्यायवाची डिंगल कोश
1. डिंगल नाम-माला – कवि हरराज
2. नागराज डिंगल-कोष – नागराज पिंगल
3. हमीर नाम-माला – हमीरदान रतनू
4. अवधान-माला – कवि उदयराम
5. नाम-माला – अज्ञात
6. डिंगल-कोष – कविराजा मुरारिदान (यह कोश डिंगल भाषा का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण शब्दकोश है।
अनेकार्थी-कोश
1. अनेकार्थी कोष – कवि उदयराम
एकाक्षरी-कोश
1. एकाक्षरी नाम-माला – वीरभाण रतनू
2. एकाक्षरी नाम-माला – कवि उदयराम ( यह स्वतंत्र शब्दकोश नहीं है, ‘कवि‑कुल‑बोध’ नामक ग्रंथ का हिस्सा है, जिसमें डिंगल शब्दों के साथ संस्कृत और लोकभाषा के अनेक शब्द संकलित हैं।) एकाक्षरी नाम से संकेत मिलता है कि इसमें एक अक्षर अथवा एक वर्ण से आरंभ होने वाले शब्दों की क्रमबद्ध सूची दी गई है, जो कि आधुनिक डिक्शनरियों की प्रकृति की है। डिंगल-काव्य में प्रयुक्त कठिन शब्दों को समझने में यह नाम-माला सहायक मानी जाती है, इसलिए डिंगल शब्दावली के पूरक स्रोत के रूप में इसका उपयोग होता है।
राजस्थानी सबदकोश
1. राजस्थानी सबदकोश – सीताराम लालस
2. राजस्थानी-हिन्दी वृहद शब्दकोश – सीताराम लालस (इस कोश में कृषि, ज्योतिष, दर्शन, खगोल, भूगोल, पशु चिकित्सा, संगीत, साहित्य, मूर्तिकला, त्यौहार, जाति, रीत-रिवाज आदि विषयों के 2 लाख से अधिक शब्दों, 15,000 मुहावरों, हजारों दोहों और विविध विषयों का संकलन किया गया है।
ये शब्दकोश डिंगल साहित्य और राजस्थानी भाषा एवं संस्कृति को समझने के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
-डॉ. मोहनलाल गुप्ता



