Sunday, April 14, 2024
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राजस्थान का विस्तार

राजस्थान का विस्तार इस प्रकार व्याख्यायित किया जा सकता है कि यह भारत वर्ष के उत्तर-पश्चिम भाग में स्थित है तथा भारत का सबसे बड़ा प्रांत है। राजस्थान प्रदेश विषम चतुर्भुजाकार आकृति में है। 230 3′ उत्तरी अक्षांश से 300 12′ उत्तरी अक्षांश तथा 690 30′ पूर्वी देशांतर से 780 17′ पूर्वी देशांतर के बीच स्थित इस प्रदेश का कुल क्षेत्रफल 3,42,239 वर्ग किलोमीटर है।

यह विशाल भू-भाग पूरे देश का लगभग दसवां भाग (10.41 प्रतिशत) है। राजस्थान प्रदेश की उत्तर-दक्षिण में अधिकतम लम्बाई 826 किलोमीटर तथा पूरब से पश्चिम में अधिकतम लम्बाई 869 किलोमीटर है।

छत्तीसगढ़ राज्य के गठन से पहले राजस्थान भौगोलिक क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का दूसरे नम्बर का सबसे बड़ा राज्य था तथा मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य था किंतु मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ निकल जाने के बाद, राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य है।

राजस्थान के धुर उत्तर में श्रीगंगानगर जिले का कोणा गाँव है तथा धुर दक्षिण में बांसवाड़ा जिले का बोरकुण्ड गाँव है। राजस्थान के धुर पूर्व में धौलपुर जिले का सिलान गाँव है तथा धुर पश्चिम में जैसलमेर जिले का कोटरी गाँव है।

विश्व के कई देशों से बड़ा है राजस्थान

यह प्रांत विश्व के अनेक राष्ट्रों से भी बड़ा है। पूरे विश्व में अपनी कीर्ति स्थापित करने वाले इजराइल से यह सत्रह गुना से भी अधिक बड़ा है। श्रीलंका से पाँच गुना, इंगलैण्ड से दो गुना तथा चेकोस्लोवाकिया से तीन गुना बड़ा है। इटली, बेल्जियम, स्विट्जरलैण्ड, यूगोस्लाविया, ईरान तथा ईराक जैसे राष्ट्र भी राजस्थान से क्षेत्रफल में कम हैं। जापान राजस्थान से कुछ ही बड़ा है।

राजस्थान का विस्तार

स्थलीय सीमा

राजस्थान की स्थलीय सीमा की लम्बाई लगभग 5920 किलोमीटर है। इसमें से 1070 किलोमीटर अंतर्राष्ट्रीय सीमा और 4850 किलोमीटर अंतर्राज्यीय सीमा है।

कर्क रेखा

कर्क रेखा राजस्थान के धुर दक्षिणी भाग में स्थित डूंगरपुर एवं बांसवाड़ा जिलों को छूती हुई निकलती है। यह डूंगरपुर जिले के चिखली गांव के दक्षिण से तथा बाँसवाड़ा जिले की कुशलगढ़ तहसील के लगभग मध्य से गुजरती है। इस प्रकार राजस्थान ऊष्म कटिबंध से बाहर स्थित है तथा विषम जलवायु वाला क्षेत्र है।

डूंगरपुर-बांसवाड़ा जिले में बहने वाली माही नदी कर्क रेखा को दो बार पार करती है। कुशलगढ़ (बाँसवाड़ा) में 21 जून को सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर लम्बवत् पड़ती हैं। गंगानगर में सूर्य की किरणें सर्वाधिक तिरछी व बाँसवाड़ा में सूर्य की किरणें सर्वाधिक सीधी पड़ती हैं। राजस्थान में सूर्य की लम्बवत् किरणें केवल बाँसवाड़ा में पड़ती हैं।

अंतर्राष्ट्रीय सीमा

राजस्थान की स्थिति तथा विस्तार को जानने के लिए इससे लगती अंतर्राष्ट्रीय सीमा को जानना भी आवश्यक है। प्रदेश की कुल 1,070 किलोमीटर लम्बी सीमा पाकिस्तान से लगी हुई है। इसे रैडक्लिफ रेखा भी कहते हैं। आजादी के समय इंगलैण्ड के माने हुए वकील रैडक्लिफ ने भारत-पाक विभाजन के लिये इस रेखा का निर्धारण किया था।

श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर तथा बाड़मेर जिले पाकिस्तान के बहावलपुर, रहीमयार तथा मीरपुर जिलों से सटे हुए हैं। अंतर्राष्ट्रीय सीमा की लम्बाई जैसलमेर जिले में 464 किमी, बाड़मेर जिले में 228 किमी, श्रीगंगानगर जिले में 210 किमी तथा बीकानेर जिले में 168 किमी है।

श्रीगंगानगर जिले का हिंदूमल कोट (आजादी से पहले यह कस्बा था किंतु अब गाँव रह गया है।) राजस्थान में पाकिस्तान की सीमा का प्रारंभ स्थल माना जाता है। राज्य में पाकिस्तान की सीमा समाप्ति का स्थान बाड़मेर जिले का शाहगढ़ माना जाता है। जालोर जिले का आकुड़िया गाँव आजादी के समय आधा भारत में रह गया और आधा पाकिस्तान में चला गया।

भारत-पाक सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिये बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स तैनात है। पाकिस्तान से लगती सीमा पर कांटेदार तार से तारबंदी की गयी है किंतु जैसलमेर जिले में लगभग 40 किमी सीमा (शाहगढ़ बल्ख) ऐसी है जिसपर तारबंदी नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बॉर्डर फ्लड लाइटों से पूरी रात प्रकाश किया जाता है ताकि कोई घुसपैठिया न घुस सके। इस प्रकाश की व्यवस्था जोधपुर विद्युत वितरण निगम द्वारा की जाती है।

अंतर्राज्यीय सीमा

राजस्थान की लगभग 4,850 किलोमीटर सीमा देश के विभिन्न प्रांतों से मिलती है। पूर्वी सीमा पर उत्तर प्रदेश, उत्तरी सीमा पर पंजाब एवं हरियाणा, दक्षिणी सीमा पर गुजरात, दक्षिणी-पूर्वी सीमा पर उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश प्रांत स्थित हैं। राज्य की सर्वाधिक 1600 कि.मी. लम्बी अंतर्राज्यीय सीमा मध्य प्रदेश के साथ लगती है। न्यूनतम सीमा रेखा पंजाब राज्य के साथ मिलती है। इसकी लम्बाई मात्र 89 किलोमीटर है।

समुद्र से दूरी एवं ऊँचाई

राजस्थान का दक्षिणी छोर कच्छ की खाड़ी से 225 किलोमीटर तथा अरब सागर से 400 किलोमीटर दूर है। राज्य का अधिकांश भाग समुद्र तल से लगभग 370 मीटर (से कम) ऊँचा है।

-डॉ. मोहनलाल गुप्ता

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