Wednesday, February 28, 2024
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राजस्थान का भूगोल

राजस्थान का भूगोल आज से करोड़ों वर्ष पहले प्रागैतिहासिक काल से आरम्भ होता है जब विश्व दो भूखण्डों- अंगारालैण्ड तथा गौंडवाना लैण्ड में बंटा हुआ था। इन दोनों भूखण्डों के बीच में टेथिस महासागर था।

टेथिस महासागर

राजस्थान का अधिकांश उत्तर-पश्चिमी मरुप्रदेश एवं उत्तर पूर्वी मैदानी भाग टेथिस महासागर के अवशेष हैं जो नदियों द्वारा लाई गई तलछट के द्वारा पाट दिये गये हैं। राजस्थान के पूर्वी मैदान स्पष्टतः गंगा यमुना नदियों द्वारा निर्मित हैं। जबकि मरुप्रदेश के भूभाग सरस्वती तथा उसकी सहायक नदियों द्वारा निर्मित हैं। टेथिस सागर के अवशेष के रूप में आज भी सांभर, डीडवाना एवं पचपदरा की खारी झीलें स्थित हैं।

गौंडवाना लैण्ड

गौंडवाना लैण्ड का एक अंश विलग होकर उत्तर की ओर खिसक गया था जिसमें से राजस्थान के अरावली पर्वत एवं दक्षिणी पठार बने।

राजस्थान का भौगोलिक परिचय – अरावली पर्वत शृंखला

प्रदेश के लगभग मध्य में उत्तर से दक्षिण की ओर अरावली पर्वतमाला स्थित है। यह गौण्डवाना भूखण्ड का अंग है। यह पर्वतमाला उत्तर-पूर्व में दिल्ली से आरंभ होकर दक्षिण-पश्चिम गुजरात में पालनपुर के निकट खेड़ब्रह्मा तक विस्तृत है जिसकी वर्तमान में कुल लम्बाई 692 किलोमीटर है। इसमें से 550 किलोमीटर पर्वतमाला राजस्थान में स्थित है। अरावली पर्वतमाला का सर्वाधिक विस्तार उदयपुर जिले में और न्यूनतम विस्तार अजमेर जिले में है।

यह पर्वतमाला संसार की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक है। राजस्थान के कुल क्षेत्रफल का 9.3 प्रतिशत भाग अरावली की पहाड़ियों से घिरा हुआ है। अरावली पर्वतमाला पूरे प्रदेश को दो स्पष्ट प्राकृतिक भागों में विभक्त करती है। इस कारण लगभग 58 प्रतिशत क्षेत्र उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में तथा लगभग 42 प्रतिशत क्षेत्र दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में विभक्त हो जाता है।

इस पर्वतमाला की सबसे ऊँची चोटियाँ दक्षिणी हिस्से में स्थित हैं। सबसे ऊँची चोटी सिरोही जिले में है जो गुरुशिखर (1722 मीटर) कहलाती है। दूसरे नम्बर की चोटी भी सिरोही जिले में है तथा सेर (1597 मीटर) कहलाती है।

दक्षिणी हिस्से की अन्य चोटियों में उदयपुर जिले की जरगा (1431 मीटर), सिरोही जिले की अचलगढ़ (1380 मीटर), राजसमंद जिले की कुंभलगढ़ (1224 मीटर) ऐसी चोटियाँ हैं जो 1000 मीटर से ऊंची हैं। अरावली पर्वतमाला के उत्तरी हिस्से में सीकर जिले की रघुनाथगढ़ (1055 मीटर) एक मात्र ऐसी चोटी है जो 1000 मीटर ऊंची है। इस हिस्से की अन्य प्रमुख चोटियों में अलवर जिले की खो (920 मीटर), भैराच (792 मीटर) तथा बैराठ (704 मीटर), अजमेर जिले की नाग पहाड़ी (855 मीटर) तथा तारागढ़ (870 मीटर) और झुंझुनूं जिले की बाबई (780 मीटर) सम्मिलित हैं।

राज्य की अन्य पहाड़ियाँ

राज्य की अन्य पहाड़ियों में झालावाड़ तथा कोटा जिलों की मुकन्दरा पहाड़ियाँ, चित्तौड़गढ़ जिले का मेसा पठार, बूंदी जिले का आडावाला पठार, बाड़मेर जिले में छप्पन की पहाड़ियाँ, जालोर जिले की सुंधा पहाड़ियाँ, राजा भाखर, इसराना भाखर, कन्यागिरि एवं कनकाचल, सीकर जिले की मालखेत पहाड़ियाँ, हर्ष की पहाड़ियाँ एवं जीणमाता पर्वत, जैसलमेर जिले की त्रिकूट पहाड़ियाँ, जोधपुर जिले का चिड़ियानाथ की टूंक पर्वत आदि प्रमुख हैं।

राजस्थान का भौगोलिक परिचय – राज्य के पठार

राजस्थान में विस्तृत अरावली तथा मध्यप्रदेश के विंध्याचल के बीच राजस्थान के छोटे-बड़े पठारी भूभाग स्थित हैं। गुरुशिखर से नीचे उड़िया पठार स्थित है जिसकी समुद्रतल से ऊँचाई 1360 मीटर है। यह राजस्थान का सबसे ऊँचा पठार है। दूसरे नम्बर पर आबू पठार आता है जिसपर आबू नगर बसा हुआ है। इसकी समुद्र तल से ऊँचाई 1200 मीटर है।

कुंभलगढ़ और गोगुंदा के बीच भोराठ का पठार है जिसकी समुद्र तल से ऊँचाई 1225 मीटर है। मालवा के पठार की समुद्र तल से ऊँचाई 360-460 मीटर है यह दक्षिण पूर्व में चित्तौड़गढ़ जिले तक विस्तृत है। कोटा, बूंदी बारां तथा झालावाड़ जिलों में हाड़ौती का पठार है जिसकी समुद्र तल से ऊँचाई 300-460 मीटर है। चित्तौड़गढ़ के भैंसरोड़गढ़ से भीलवाड़ा जिले के बिजौलिया तक ऊपरमाल का पठार है। उदयपुर जिले की जयसमंद झील से प्रतापगढ़ तक लासड़िया का पठार है। चित्तौड़गढ़ जिले में मेसा का पठार है जिस पर चित्तौड़ का दुर्ग स्थित है।

माही बेसिन में प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा के बीच छप्पन नदी नालों का प्रवाह क्षेत्र छप्पन का मैदान कहलाता है।

राजस्थान का भौगोलिक परिचय – प्राकृतिक विभाग

प्रदेश की प्राकृतिक बनावट एक समान नहीं है। भौगोलिक दृष्टि से सम्पूर्ण प्रदेश को चार प्राकृतिक भागों में विभक्त किया जा सकता है- (1) उत्तर-पश्चिम का रेतीला भाग, (2) मध्य में स्थित अरावली का पर्वतीय भाग, (3) पूर्वी मैदानी भाग, (4) दक्षिण पूर्व का पठारी प्रदेश।

(1) उत्तर-पश्चिमी रेतीला भाग

राजस्थान के उत्तर पश्चिम में थार का विस्तृत मरुस्थल स्थित है जो अरावली पहाड़ियों के उत्तर-पश्चिमी ढाल के 480 से 608 किलोमीटर तक फैला हुआ है। यहाँ वर्षा का वार्षिक औसत 15 इंच से 20 इंच तक रहता है। उत्तरी गोलार्ध में स्थित अफ्रीका का सहारा रेगिस्तान, अरब देशों का अरबी रेगिस्तान, पाकिस्तान का सिंध रेगिस्तान तथा राजस्थान का थार रेगिस्तान वस्तुतः एक ही मरुस्थल के भाग हैं।

विस्तार की दृष्टि से राजस्थान का यह भूभाग शेष प्राकृतिक भागों से काफी बड़ा है। प्रदेश का 61.11 प्रतिशत क्षेत्र इसी भाग में है तथा प्रदेश की कुल जनसंख्या का 40 प्रतिशत भाग इस भाग में रहता है। इस भाग में श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, चूरू, नागौर, जोधपुर जैसलमेर, बाड़मेर तथा जालोर जिले आते हैं।  थार रेगिस्तान विश्व का सर्वाधिक सघन बसावट वाला रेगिस्तान है। आकार की दृष्टि से थार रेगिस्तान विश्व का 18वें नम्बर का सबट्रोपिकल रेगिस्तान है।

(2) मध्य में स्थित अरावली का पर्वतीय भाग

राजस्थान के लगभग मध्य में दक्षिण पश्चिम से उत्तर पूर्व की ओर स्थित अरावली पर्वत माला की लम्बाई झुंझनूं से सिरोही तक लगभग 550 किलोमीटर है। यह पर्वतमाला बीच-बीच से टूटी हुई है तथा इसकी औसत ऊँचाई समुद्र तट से 915 मीटर है। प्रदेश का कुल 9.3 प्रतिशत क्षेत्र इस भाग में आता है तथा प्रदेश की 17 प्रतिशत जनसंख्या इस भाग में रहती है। इस भाग में सिरोही का पूर्वी भाग, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, पाली तथा अजमेर जिले आते हैं।

(3) पूर्व का मैदानी भाग

अरावली पर्वत के पूर्व में स्थित मैदानी भाग आगे चलकर गंगा यमुना के दो आब में मिल जाता है। इस समतल मैदानी भाग में प्रदेश का 23.3 प्रतिशत क्षेत्र आता है तथा प्रदेश की लगभग 40 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है। इस भाग में वर्षा का वार्षिक औसत 40 इंच से 80 इंच है। प्राकृतिक वैशिष्ट्य के कारण यह सब से घना बसा हुआ और उन्नत क्षेत्र है।

इस भाग को दो उपविभागों- माही का मैदान तथा बनास का मैदान में बांटा जा सकता है। माही का मैदान में उदयपुर जिले का दक्षिण पूर्वी भाग, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़ जिले का दक्षिणी भाग आता है। बनास का मैदान वाले भाग में अलवर, जयपुर, सवाईमाधोपुर, भरतपुर, सीकर, झुंझुनूं, टौंक, पश्चिमी चित्तौड़गढ़ व भीलवाड़ा जिले आते हैं।

(4) दक्षिण-पूर्वी पठारी भाग

हाड़ौती के पठार के नाम से विख्यात यह पठार आगे चलकर मालवा के पठार में मिल जाता है। प्रदेश का कुल 10 प्रतिशत क्षेत्र इस भाग में आता है तथा जनसंख्या का लगभग 12 प्रतिशत भाग इस क्षेत्र में निवास करता है। इस भाग में कोटा, बूंदी, झालावाड़, चित्तौड़ जिले का कुछ भाग आते हैं। यह पठार वस्तुतः दक्षिण के पठार का उत्तरी किनारा है जो संसार के प्राचीनतम पठारों में से एक है।

क्षेत्र के आधार पर राजस्थान का विभाजन

1. पूर्वी राजस्थान

जयपुर, दौसा, अलवर, धौलपुर, सवाईमाधोपुर, भरतपुर, टोंक, सीकर, झुंझुनूं, अजमेर व करौली।

2. दक्षिणी-पूर्वी राजस्थान

कोटा, बारां, बूंदी एवं झालावाड़।

3. दक्षिणी राजस्थान

उदयपुर, राजसमंद, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा तथा प्रतापगढ़।

4. पश्चिमी राजस्थान

जैसलमेर, नागौर, जोधपुर, बाड़मेर, जालोर, सिरोही, पाली।

5. उत्तरी राजस्थान

बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ एवं चूरू।

राजस्थान के भूगोल की विशेषताएँ

राजस्थान के भूगोल की अनेक विशेषताएँ हैं। इस प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी भाग में संसार का प्रसिद्ध थार का मरुस्थल है जो इस प्रदेश के लगभग 61.11 प्रतिशत भूभाग का निर्माण करता है। प्रदेश के मध्य भाग में संसार की सबसे प्राचीन पर्वतमाला है जो अरावली के नाम से जानी जाती है। इससे प्रदेश के लगभग 9.3 प्रतिशत भूभाग का निर्माण हुआ है।

प्रदेश के पूर्वी हिस्से में मैदानी भूभाग है। इससे प्रदेश का 23.3 प्रतिशत क्षेत्र का निर्माण हुआ है। प्रदेश का चौथा भाग विश्व प्रसिद्ध दक्कन लावा पठार से बना हुआ है। यह क्षेत्र राज्य के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में है जो कि राज्य के लगभग 9 प्रतिशत भाग का निर्माण करता है। यह विंध्यन कगार का निर्माण करता है। इसे मालवा का पठार भी कहते हैं। मुकंदरा की पहाड़ियां इसी का हिस्सा हैं।

-डॉ. मोहनलाल गुप्ता

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