राजस्थान भारतीय संस्कृति और इतिहास का जीवंत प्रतीक है। यहाँ के पर्यटन स्थल (Tourist Places) और लोककलाएँ (Folk Arts) न केवल देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करती हैं, बल्कि राज्य की आर्थिक और सामाजिक संरचना को भी सुदृढ़ बनाती हैं। डॉ. मोहनलाल गुप्ता की पुस्तक “राजस्थान में पर्यटन स्थलों का प्रबंधन तथा लोककलाओं का संरक्षण” इसी विषय पर केंद्रित है। यह पुस्तक राजस्थान के पर्यटन विकास, प्रबंधन की चुनौतियों और लोककलाओं के संरक्षण की आवश्यकता को गहराई से प्रस्तुत करती है।
राजस्थान में पर्यटन स्थलों का प्रबंधन तथा लोककलाओं का संरक्षण
✍️ 1. पर्यटन स्थलों का महत्व
राजस्थान के प्रमुख पर्यटन स्थल (Tourist Attractions) जैसे जयपुर का आमेर किला, उदयपुर की झीलें, जैसलमेर का सोनार किला, अजमेर का दरगाह शरीफ और माउंट आबू का प्राकृतिक सौंदर्य विश्वभर में प्रसिद्ध हैं। पुस्तक में इन स्थलों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को विस्तार से बताया गया है। लेखक यह स्पष्ट करते हैं कि इन स्थलों का व्यवस्थित प्रबंधन (Management) ही राज्य की पर्यटन अर्थव्यवस्था को स्थायी बना सकता है।
✍️ 2. पर्यटन प्रबंधन की चुनौतियाँ
डॉ. गुप्ता ने पुस्तक में यह रेखांकित किया है कि राजस्थान में पर्यटन स्थलों के प्रबंधन में कई चुनौतियाँ हैं—
- अत्यधिक भीड़ (Overcrowding)
- पर्यावरणीय क्षति (Environmental Damage)
- सुविधाओं की कमी (Lack of Facilities)
- सुरक्षा और संरक्षण (Security & Preservation)
लेखक का मानना है कि यदि इन चुनौतियों का समाधान आधुनिक तकनीक और स्थानीय सहभागिता से किया जाए तो पर्यटन स्थलों की आकर्षण शक्ति और भी बढ़ सकती है।
✍️ 3. लोककलाओं का संरक्षण
राजस्थान की लोककलाएँ (Folk Arts) जैसे गवरी नृत्य, कालबेलिया, चंग, पपेट शो (Puppet Show), मांड गायन और पिचवाई चित्रकला राज्य की सांस्कृतिक पहचान हैं। पुस्तक में यह बताया गया है कि इन कलाओं का संरक्षण केवल सांस्कृतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यटन विकास के लिए भी आवश्यक है।
- लोककलाओं को पर्यटन पैकेज (Tourism Packages) में शामिल करना
- कलाकारों को आर्थिक सहयोग और प्रशिक्षण देना
- डिजिटल माध्यमों से लोककलाओं का प्रचार-प्रसार करना
ये उपाय लोककलाओं को जीवंत बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं।
✍️ 4. पुस्तक की प्रमुख थीम
इस पुस्तक का मुख्य कीफ्रेज है – “राजस्थान में पर्यटन स्थलों का प्रबंधन तथा लोककलाओं का संरक्षण”। लेखक ने इसे पाँच प्रमुख आयामों में बाँटा है:
- पर्यटन स्थलों का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
- प्रबंधन की आधुनिक रणनीतियाँ
- लोककलाओं की विविधता और संरक्षण
- पर्यटन और लोककलाओं का परस्पर संबंध
- राज्य की आर्थिक उन्नति में पर्यटन की भूमिका
✍️ 5. पर्यटन और लोककलाओं का परस्पर संबंध
डॉ. गुप्ता यह स्पष्ट करते हैं कि पर्यटन (Tourism) और लोककलाएँ (Folk Arts) एक-दूसरे के पूरक हैं। जब पर्यटक राजस्थान आते हैं, तो वे केवल किलों और महलों को ही नहीं देखते, बल्कि लोकनृत्य, लोकगीत और हस्तशिल्प का भी आनंद लेते हैं। इस प्रकार पर्यटन स्थलों का प्रबंधन और लोककलाओं का संरक्षण एक साथ चलना चाहिए।
✍️ 6. पुस्तक का व्यावहारिक दृष्टिकोण
लेखक ने पुस्तक में कई व्यावहारिक सुझाव दिए हैं:
- स्मार्ट प्रबंधन प्रणाली (Smart Management System) का उपयोग
- ईको-टूरिज्म (Eco-Tourism) को बढ़ावा
- सांस्कृतिक उत्सव (Cultural Festivals) का आयोजन
- स्थानीय समुदाय (Local Community) की भागीदारी
इन उपायों से न केवल पर्यटन स्थलों का आकर्षण बढ़ेगा, बल्कि लोककलाओं को भी नई पहचान मिलेगी।
✍️ 7. निष्कर्ष
डॉ. मोहनलाल गुप्ता की पुस्तक “राजस्थान में पर्यटन स्थलों का प्रबंधन तथा लोककलाओं का संरक्षण” राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने और पर्यटन को व्यवस्थित बनाने का एक सशक्त दस्तावेज है। इसमें बार-बार यह रेखांकित किया गया है कि राजस्थान में पर्यटन स्थलों का प्रबंधन तथा लोककलाओं का संरक्षण राज्य की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक उन्नति के लिए अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा भारत के इतिहास से सम्बन्धित महत्वपूर्ण पुस्तकों का परिचय हमारी वैबसाइट भारत का इतिहास पर उपलब्ध है।
-मधुबाला गुप्ता



