राजस्थान की वीर प्रसूता भूमि में नागौर (Nagaur) का अपना एक विशिष्ट स्थान है। डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा रचित ग्रंथ ‘नागौर का राजनीतिक एवं सांस्कृतिक इतिहास‘ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि अहिछत्रपुर (नागौर का प्राचीन नाम) की सदियों पुरानी सभ्यता और संस्कृति का एक प्रामाणिक संकलन है।
यदि आप राजस्थान के गौरवशाली इतिहास (Glorious History of Rajasthan) को गहराई से समझना चाहते हैं, तो यह ग्रंथ आपके लिए एक अनिवार्य मार्गदर्शिका सिद्ध होगा।
ग्रन्थ की विषय-वस्तु और ऐतिहासिक विस्तार (Content and Historical Scope)
डॉ. मोहनलाल गुप्ता ने इस पुस्तक में नागौर का राजनीतिक एवं सांस्कृतिक इतिहास लिखने के लिए व्यापक शोध का सहारा लिया है। उन्होंने प्रागैतिहासिक काल से लेकर आधुनिक युग तक के नागौर को खंडों में विभाजित किया है।
- प्राचीन काल: पुस्तक की शुरुआत महाभारत कालीन संदर्भों और जांगल देश की राजधानी अहिछत्रपुर के वर्णन से होती है। लेखक ने पुरातात्विक साक्ष्यों के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि नागौर भारतीय राजनीति का केंद्र रहा है।
- मध्यकालीन संघर्ष: नागौर का किला (Nagaur Fort) सत्ता का प्रमुख केंद्र था। डॉ. गुप्ता ने चौहानों, मुगलों और राठौड़ वंश के बीच हुए संघर्षों और संधियों का बड़ी सूक्ष्मता से विश्लेषण किया है। अमर सिंह राठौड़ की वीरता के प्रसंग पुस्तक में विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। पुस्तक में नागौर जिले से प्राप्त शिलालेखों की भी विस्तृत सूची दी गई है।
- सांस्कृतिक समृद्धि: लेखक ने केवल युद्धों का वर्णन नहीं किया, बल्कि यहाँ की सूफी परंपरा, मंदिरों की स्थापत्य कला और लोक देवताओं के प्रभाव को भी विस्तार दिया है।
डॉ. मोहनलाल गुप्ता की लेखन शैली (Writing Style of Dr. Mohanlal Gupta)
इस ग्रंथ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरल और बोधगम्य भाषा है। लेखक ने कठिन ऐतिहासिक तथ्यों को भी एक कहानी की तरह पिरोया है, जिससे पाठक की जिज्ञासा अंत तक बनी रहती है। नागौर का राजनीतिक एवं सांस्कृतिक इतिहास लिखते समय डॉ. गुप्ता ने निष्पक्षता का विशेष ध्यान रखा है। उन्होंने प्राथमिक स्रोतों, जैसे शिलालेखों, सिक्कों और हस्तलिखित ग्रंथों का हवाला दिया है, जो इस कृति को अकादमिक दृष्टि से अत्यंत विश्वसनीय (Reliable) बनाता है।
प्रमुख आकर्षण: सांस्कृतिक पक्ष और जनजीवन
नागौर अपनी ‘मिश्रित संस्कृति’ (Syncretic Culture) के लिए जाना जाता है। पुस्तक में हमीदुद्दीन नागौरी की दरगाह और यहाँ के जैन मंदिरों का वर्णन यह दर्शाता है कि नागौर हमेशा से धार्मिक सद्भाव का केंद्र रहा है। डॉ. गुप्ता ने यहाँ के मेलों, विशेषकर प्रसिद्ध नागौर पशु मेले (Nagaur Cattle Fair) और हस्तशिल्प का भी जिक्र किया है, जो इस क्षेत्र की आर्थिक रीढ़ रहे हैं।
इस पुस्तक की प्रासंगिकता (Relevance of the Book)
आज के डिजिटल युग में, जहाँ इतिहास को अक्सर तोड़-मरोड़ कर पेश किया जाता है, नागौर का राजनीतिक एवं सांस्कृतिक इतिहास जैसे ग्रंथ हमें अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं।
- शोधकर्ताओं के लिए: यह पुस्तक शोधार्थियों (Researchers) के लिए एक संदर्भ ग्रंथ के रूप में कार्य करती है।
- प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए: आरपीएससी (RPSC) और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए यह तथ्यों का खजाना है।
- इतिहास प्रेमियों के लिए: जो लोग राजस्थान की वास्तुकला और सामंती इतिहास में रुचि रखते हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन संग्रहणीय वस्तु है।
निष्कर्ष (Conclusion)
निष्कर्षतः, डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित नागौर का राजनीतिक एवं सांस्कृतिक इतिहास क्षेत्रीय इतिहास-लेखन की परंपरा में एक मील का पत्थर है। यह ग्रंथ न केवल नागौर के शासकों की वीरता को नमन करता है, बल्कि यहाँ के आम जनजीवन, कला और साहित्य के विकास को भी रेखांकित करता है। यदि आप मरुधरा के इस ऐतिहासिक जिले की आत्मा को छूना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आपकी लाइब्रेरी में अवश्य होनी चाहिए।
यह ग्रंथ सिद्ध करता है कि नागौर का राजनीतिक एवं सांस्कृतिक इतिहास केवल अतीत का अध्ययन नहीं है, बल्कि वर्तमान और भविष्य की समझ के लिए भी आवश्यक है।
डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा भारत के इतिहास से सम्बन्धित महत्वपूर्ण पुस्तकों का परिचय हमारी वैबसाइट भारत का इतिहास पर उपलब्ध है।
-मधुबाला गुप्ता



