“डॉ. मोहनलाल गुप्ता की अजमेर का वृहत् इतिहास पुस्तक (Ajmer ka Vrihat Itihas) अजमेर नगर के प्राचीन वैभव, पृथ्वीराज चौहान के संघर्ष, अजमेर शरीफ दरगाह की आस्था और आधुनिक शिक्षा व संस्कृति का समग्र चित्रण करती है। राजस्थान की धरोहर (Rajasthan Heritage) और अजमेर का इतिहास (Ajmer History) जानने के लिए यह पुस्तक अनमोल स्रोत है।”
अजमेर का वृहत् इतिहास – पुस्तक परिचय
📌प्रस्तावना
डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित अजमेर का वृहत् इतिहास पुस्तक भारतीय इतिहास की एक महत्त्वपूर्ण कृति है। लेखक ने इस पुस्तक में अजमेर नगर की ऐतिहासिक यात्रा को अत्यंत रोचक और शोधपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया है। अजमेर, जिसे “राजस्थान का हृदय” कहा जाता है, सदियों से राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। यह नगर हर युग में भारत के बड़े शासकों के लिए चुनौती रहा है। अजमेर के लिए लाखों लोगों ने बलिदान दिया।
✍️ 1. प्राचीन काल का अजमेर
अजमेर का वृहत् इतिहास पुस्तक में बताया गया है कि अजमेर (Ajmer City) का उद्भव प्राचीन सभ्यताओं से जुड़ा हुआ है। लेखक ने अजमेर के स्थापना काल के सम्बन्ध में प्रचलित विभिन्न धारणाओं में से सही धारणा स्थापित करने के लिए विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों का बहुत अच्छा उपयोग किया है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ियाँ और उद्यान प्राचीन काल से ही आकर्षण का केंद्र रहे हैं। लेखक ने उल्लेख किया है कि 12वीं शताब्दी में हसन निज़ामी ने लिखा कि अजमेर के बागीचे सात रंगों से सजे हुए थे और इसकी प्राकृतिक सुंदरता चीन की चित्रदीर्घा की याद दिलाती थी। पुष्पों की सुगंध और उद्यानों की शोभा इसे स्वर्गीय वातावरण प्रदान करती थी।
✍️ 2. मध्यकालीन संघर्ष और शासक
अजमेर का वृहत् इतिहास पुस्तक (Ajmer ka Vrihat Itihas) में विशेष रूप से मध्यकालीन दौर का वर्णन है। चौहान वंश का उदय (Rise of Chauhan Dynasty) और पृथ्वीराज चौहान का शासन अजमेर के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। पृथ्वीराज चौहान (Prithviraj Chauhan) के पूर्वजों ने अजमेर को अपनी राजधानी बनाया। बाद में मुस्लिम शासकों के आक्रमणों ने इस नगर को राजनीतिक संघर्षों का केंद्र बना दिया। अजमेर ने बार-बार दिल्ली के शासकों को चुनौती दी।
✍️ 3. धार्मिक महत्व
अजमेर का धार्मिक महत्व भी पुस्तक में विस्तार से वर्णित है। अजमेर जिले में स्थित पुष्कर हजारों साल से हिन्दुओं का प्रमुख तीर्थ है। पुष्कर (Pushkar) का ब्रह्मा मंदिरविश्व प्रसिद्ध है। अजमेर नगर में सोनीजी की नसियां जैन धर्मावलम्बियों का प्रमुख स्थल है। अजमेर में सूफी दरवेश ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह है जिसमें दुनिया भर के मुसलमान भारतीय नेता, खिलाड़ी और सिनेमा के अभिनेता-अभिनेत्री अपनी प्रसिद्धि बढ़ाने के लिए आते रहते हैं।
✍️ 4. आधुनिक काल और शिक्षा
डॉ. गुप्ता ने आधुनिक काल में अजमेर के विकास को भी रेखांकित किया है। यहाँ दयानंद महाविद्यालय (Dayanand College) और अन्य शैक्षणिक संस्थानों ने शिक्षा के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान (Ajmer’s Contribution to Education) दिया। लेखक स्वयं 1980 से 1984 तक दयानंद महाविद्यालय अजमेर में विद्यार्थी रहे, जिससे पुस्तक में व्यक्तिगत अनुभव भी जुड़ गए हैं।
✍️ 5. सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन
यह नगर हर युग में सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। अजमेर की सामाजिक संरचना ने राजस्थान की पहचान को गहराई दी। पुस्तक में अजमेर के सांस्कृतिक जीवन (Cultural Life in Ajmer) का भी सुंदर चित्रण है। यहाँ के मेले, उत्सव और लोककला अजमेर की पहचान हैं। पुस्तक में इनका सुंदर चित्रण किया गया है। लेखक ने बताया है कि अजमेर नगर ने हर युग में भारत के बड़े शासकों को चुनौती दी और लाखों लोगों ने इसके लिए बलिदान दिया।
📌 निष्कर्ष
डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित अजमेर का वृहत् इतिहास पुस्तक (Ajmer ka Vrihat Itihas) केवल एक ऐतिहासिक ग्रंथ नहीं, बल्कि अजमेर की आत्मा को समझने का माध्यम है। इसमें प्राचीन वैभव, मध्यकालीन संघर्ष, धार्मिक महत्व (Religions Importance of Ajmer) और आधुनिक विकास का संतुलित चित्रण मिलता है।
निष्कर्षतः यह पुस्तक अजमेर नगर की ऐतिहासिक यात्रा को समग्र रूप से प्रस्तुत करती है और राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर को समझने के लिए अनिवार्य स्रोत है।
डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा भारत के इतिहास से सम्बन्धित महत्वपूर्ण पुस्तकों का परिचय हमारी वैबसाइट भारत का इतिहास पर उपलब्ध है।
-मधुबाला गुप्ता



