डॉ. मोहनलाल गुप्ता की पुस्तक किशनगढ़ राज्य का इतिहास राजस्थान की एक छोटी किंतु गौरवशाली रियासत के उत्थान, संघर्ष और सांस्कृतिक योगदान का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करती है। इसमें मुगलकालीन राजनीति, राजपूताना की परम्पराएँ, उत्तराधिकार संघर्ष और किशनगढ़ की कलात्मक धरोहर को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है।
किशनगढ़ राज्य का इतिहास – विषय-वस्तु
✍️ 1. परिचय
डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित किशनगढ़ राज्य का इतिहास (Kishangarh State History) राजस्थान की सबसे छोटी रियासत के संघर्षपूर्ण अतीत को उजागर करती है। यह पुस्तक बताती है कि कैसे किशनगढ़ राज्य मध्यकालीन राजपूताना (Rajputana) में जयपुर (आम्बेर), जोधपुर, बीकानेर और मेवाड़ जैसी शक्तिशाली रियासतों के बीच अपना अस्तित्व बनाए रखने में सफल रहा। किशनगढ़ राज्य ने हिन्दू परम्पराओं, मुगलकालीन संघर्ष (Mughal Era Struggles) और सांस्कृतिक धरोहर (Cultural Heritage) को अपने भीतर दीर्घकाल तक जीवित रखा।
✍️ 2. स्थापना और प्रारंभिक दौर
किशनगढ़ रियासत की स्थापना मुगलकाल में हुई थी। राजा रूपसिंह का उल्लेख विशेष रूप से किया गया है, जिन्होंने धरमत के युद्ध में औरंगज़ेब के हाथी की रस्सियाँ काट दी थीं। यह घटना न केवल वीरता (Bravery) का प्रतीक है बल्कि यह भी दर्शाती है कि इस छोटे से हिन्दू राज्य का इतिहास साहस और आत्मसम्मान की मिसाल है।
✍️ 3. उत्तराधिकार और संघर्ष
पुस्तक में उत्तराधिकार विवाद (Succession Disputes) और राजपूत परम्परा (Rajput Tradition) पर भी प्रकाश डाला गया है। अकबर के शासनकाल से ही राजपूताना राज्यों में गद्दी के लिए संघर्ष बढ़ने लगे थे। किशनगढ़ भी इन विवादों से अछूता नहीं रहा। डॉ. गुप्ता ने विस्तार से बताया है कि कैसे मुगल दरबार की राजनीति ने परम्परागत उत्तराधिकार को चुनौती दी और इससे छोटे राज्यों की स्थिरता प्रभावित हुई।
✍️ 4. किशनगढ़ राज्य का सांस्कृतिक योगदान
सांस्कृतिक दृष्टि से इस छोटे से हिन्दू राज्य का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। यहाँ की किशनगढ़ चित्रकला (Kishangarh Painting) भारतीय कला जगत में विशिष्ट स्थान रखती है। राधा-कृष्ण की भावनात्मक अभिव्यक्तियाँ, सावन-भादों के दृश्य और दरबारी जीवन के चित्रण इस शैली की पहचान बने। इस प्रकार किशनगढ़ राज्य का इतिहास केवल राजनीतिक संघर्षों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कला और संस्कृति की अमूल्य धरोहर भी है।
✍️ 5. किशनगढ़ राज्य की राजनीतिक स्थिति
राजनीतिक दृष्टि से इतनी छोटी रियासत का अस्तित्व बनाए रखना किसी चमत्कार से कम नहीं था। पड़ोसी रियासतों के दबाव और मुगल दरबार की राजनीति के बीच किशनगढ़ ने अपनी स्वतंत्र पहचान (Independent Identity) बनाई। यह राज्य भले ही छोटा था, लेकिन उसकी रणनीतिक स्थिति और सांस्कृतिक योगदान ने उसे विशिष्ट बना दिया।
✍️ 6. आधुनिक काल और महत्व
डॉ. गुप्ता ने पुस्तक में Princely State Kishangarh के आधुनिक काल तक के विकास को भी दर्ज किया है। ब्रिटिश काल में किशनगढ़ राज्य राजपूताना एजेंसी का हिस्सा बना। डॉ. गुप्ता ने पुस्तक में ब्रिटिश कालीन प्रशासन (British Administration) और स्वतंत्रता संग्राम (Freedom Struggle) के दौर का भी उल्लेख किया है। स्वतंत्रता के बाद यह राज्य राजस्थान में सम्मिलित हुआ और आधुनिक प्रशासनिक ढाँचे का हिस्सा बना।
📌 निष्कर्ष
डॉ. मोहनलाल गुप्ता की यह पुस्तक केवल एक रियासत का इतिहास नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक और राजनीतिक यात्रा का महत्वपूर्ण अध्याय है। इसमें वीरता, परम्परा, संघर्ष और कला का ऐसा संगम मिलता है जो पाठकों को राजस्थान के गौरवशाली अतीत से जोड़ता है।
डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा भारत के इतिहास से सम्बन्धित महत्वपूर्ण पुस्तकों का परिचय हमारी वैबसाइट भारत का इतिहास पर उपलब्ध है।
-मधुबाला गुप्ता



