सलूम्बर जिला मुख्यतः आदिवासी क्षेत्र है। इस जिले में भील बड़ी संख्या में निवास करते हैं।महाराणा प्रताप ने इस जिले जिले की सराडा तहसील में स्थित चावण्ड में काफी समय तक निवास किया था। चावण्ड में ही महाराणा प्रताप का निधन हुआ था।
रियासती काल में भीलों की स्थित में सुधार लाने के लिए मांवजी ने लसाड़िया आंदोलन आरम्भ किया था। सराडा तहसील में काथोड़िया जनजाति बड़ी संख्या में निवास करती है। ये लोग खैर वृक्ष से कत्था तैयार करते हैं जो दवाओं के रूप में तथा पान के पत्ते पर लगाने के काम आता है।
राजस्थान का निर्माण होने से पहले मेवाड़ रियासत में सलूम्बर नामक एक प्राचीन ठिकाना था। आजादी के बाद जब उदयपुर जिला जिला बना तो सलूम्बर को उदयपुर संभाग के अंतर्गत रखा गया तथा तहसील मुख्यालय बनाया गया।
वर्ष 2023 में उदयपुर जिले का पुनर्गठन करके सलूम्बर जिला बनाया गया है। जिले में जयसमंद नामक झील है जिसे ढेबर भी कहा जाता है। इस झील का निर्माण ईस्वी 1691 में महाराणा जयसिंह ने गोमती नदी का जल रोककर करवाया था। जिले में स्थित जयसमंद अभयारण्य को जलचरों की बस्ती भी कहा जाता है। सलूम्बर जिले में सलूम्बर, सराड़ा, सेमारी, लसाड़ियाटी तथा झल्लारा नामक तहसीलें स्थापित की गई हैं। लसाड़िया तहसील में लसाड़िया का पठार है।