Wednesday, February 18, 2026
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प्रागैतिहासिक खण्ड

प्रागैतिहासिक खण्ड मानव इतिहास के उस कालखण्ड को कहा जाता है जब मनुष्य पत्थरों के उपकरण एवं औजार काम में लेता था। उसने खेती करना, कपड़े बुनना, घर बनाना आदि कार्य नहीं सीखे थे।
लगभग पूरे राजस्थान में प्रागैतिहासिक बस्तियां अथवा प्रागैतिहासिक युग के पुरातत्व साक्ष्य प्राप्त होते हैं किंतु इनकी संख्या अरावली पर्वत के पूर्वी भाग में अधिक है। प्रागैतिकासिक काल के मानवों की अधिकांश बस्तियाँ उन पहाड़ी क्षेत्रों में हैं जो किसी नदी के तटवर्ती क्षेत्र में स्थित हैं।
राजस्थान में प्रागैतिहासिक खण्ड की बस्तियों में मध्य युगीन एवं नूतन युगीन बस्तियाँ अधिक संख्या में मिली हैं। राजस्थान में पुरा युगीन बस्तियां नहीं मिली हैं किंतु उस युग के कुछ औजार यत्र-तत्र प्राप्त हुए हैं।
पश्चिमी राजस्थान में प्रागैतिहासिक खण्ड की बस्तियां लूनी नदी एवं उसकी सहायक नदियों के बहाव क्षेत्र में प्राप्त होती हैं। इनमें से बहुत सी बस्तियों पर बाद में रेत के टीले फैल गए जिसके कारण इन बस्तियों का पता लगाना कठिन है। इसी प्रकार बहुत सी बस्तियों पर तृतीय कांस्य कालीन अर्थात् सैंधव कालीन बस्तियां बस गईं। इन समस्त कारणों से पश्चिमी राजस्थान में प्रागैतिहासिक बस्तियों के अवशेष बहुत कम संख्या में खोजे जा सके हैं।

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