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फलौदी जिला

फलौदी जिला वर्ष 2023 में जोधपुर जिले से अलग होकर अस्तित्व में आया है। रियासती काल में यह राठौड़ राजपूतों द्वारा शासित क्षेत्र था। जिला मुख्यालय फलौदी को नमक उत्पादन के लिए जाना जाता है तथा इसे नमक नगरी कहा जाता है। फलौदी भारत के सबसे गर्म स्थानों में से एक हैं। वर्ष 2022 में फलौदी कस्बे का तापमान 54 डिग्री सेल्सियस तक मापा गया। फलौदी को भारत के सबसे शुष्क स्थान के रूप में भी जाना जाता है।

फलौदी जिले के मुख्य कस्बों में फलौदी, बाप और लोहावट और मुख्य गांवों में हिंडाल गोल, लोर्डियां, रामदेवरा, पीलवा, सांवरीज, देचू, ढढू, जाम्बा खीचन, बाप, लोहावट, जालोड़ा खारा छीला, बैंगटी जागरियॉं बावड़ी कुशलावा आदि सम्मिलित हैं।

फलौदी का प्राचीन नाम विजयनगर था। मान्यता है कि फलवृद्धिका देवी के नाम पर इस गांव का नाम रखा गया था जो बिगड़ कर फलौदी हो गया। यह भी मान्यता है कि ईस्वी 1458 में सिद्धू कल्ला ने अपनी विधवा पुत्री फला के नाम पर फलौदी गांव की स्थापना की। फलौदी एवं खींचन गांवों में प्रति वर्ष साइबर क्रेन नाम पक्षी शीत-प्रवास के लिए आता है जिसे स्थानीय भाषा में कुर्जा कहा जाता है।

1962 की भारत-चीन की लड़ाई में शहीद हुए मेजर शैतान सिंह फलोदी के निकट बाणासर गांव के रहने वाले थे। अब यह गांव शैतान सिंह नगर कहलाता है। मेजर शैतानसिंह को मरणोपरांत परमवीर चक्र मिला।

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