Thursday, January 22, 2026
spot_img
Home मारवाड़

मारवाड़

मारवाड़ सांस्कृतिक क्षेत्र रेगिस्तान के पूर्वी किनारे की तरफ स्थित है। संस्कृत ग्रंथों में मरुस्थल को मरुवार कहा गया है जिसका अर्थ है मृत्यु का स्थल। राजस्थान बनने से पहले यह क्षेत्र जोधपुर रियासत के अधीन था जिसका प्राचीन नाम मारवाड़ रियासत था। इस रियासत की स्थापना राठौड़ों ने की थी। मालानी के राजकुमार राव चूण्डा ने मण्डोर पर अधिकार करके इस राज्य की स्थापना की। बाद में उसके वंशज जोधा ने ई.1459 में जोधपुर बसाया।

जोधपुर राज्य के राजस्थान में विलीनीकरण के बाद इसमें से जोधपुर, पाली, जालोर, नागौर तथा बाड़मेर जिलों का निर्माण किया गया था। वर्तमान में मारवाड़ सांस्कृतिक क्षेत्र के जिलों की स्थिति इस प्रकार है-

जोधपुर संभाग: जोधपुर संभाग में जोधपुर राज्य में से बनाए गए जोधपुर, पाली, जालौर फलौदी, बालोतरा तथा बाड़मेर जिले रखे गए हैं।

अजमेर संभाग: जोधपुर राज्य में से बनाए गए नागौर तथा डीडवाना-कुचामन जिले अजमेर संभाग में रखे गए हैं।

आजादी से पहले जैसलमेर एक अलग रियासत थी। आजादी के बाद जैसलमेर को अलग जिला बनाया गया तथा उसे जोधपुर संभाग में रखा गया।

आजादी से पहले सिरोही एक अलग रियासत थी, आजादी के बाद सिरोही जिले का गठन किया गया तथा इसे जोधपुर संभाग के अंतर्गत रखा गया है।

- Advertisement -

Latest articles

कुवलयमाला में प्रयुक्त भाषाएँ - www.rajasthanhistory.com

कुवलयमाला में प्रयुक्त भाषाएँ

0
प्राकृत साहित्य के विशाल भंडार में जैन आचार्य उद्योतन सूरि द्वारा चंपू काव्य शैली (गद्य और पद्य मिश्रण) में रचित 'कुवलयमाला' (8वीं शताब्दी, रचना...
नागौर के इतिहासकार - www.rajasthanhistory.com

नागौर के इतिहासकार

0
नागौर के इतिहासकार इस क्षेत्र के इतिहास को गहराई के साथ लिखने में सफल रहे हैं। इन इतिहासकारों ने नागौर के राजनीतिक, सांस्कृतिकऔर धार्मिक...
कुवलयमाला - www.rajasthanhistory.com

कुवलयमाला: आचार्य उद्योतनसूरि का प्राकृत ग्रंथ

0
भारतीय साहित्य में अनेक ग्रंथ ऐसे हैं जो केवल धार्मिक या ऐतिहासिक महत्व ही नहीं रखते, अपितु समाज और संस्कृति की गहरी झलक भी...
जालोर के इतिहासकार - www.rajasthanhistory.com

जालोर के इतिहासकार

0
जालोर का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली रहा है, जिसे समय-समय पर विभिन्न मध्यकालीन कवियों और आधुनिक इतिहासकारों ने अपनी लेखनी के माध्यम से...
कान्हड़दे प्रबंध - www.rajasthanhistory.com

कान्हड़दे प्रबंध: जालौर के स्वाभिमान और हिन्दू शौर्य का अद्भुत ग्रंथ

0
कान्हड़दे प्रबंध (Kanhadde Prabandh) कवि पद्मनाभ (Padmanabh) द्वारा रचित अपभ्रंश ग्रंथ है, जिसमें जालौर के चहमान शासक रावल कान्हड़देव की वीरता, अलाउद्दीन खिलजी (Alauddin...
// disable viewing page source