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ज्येष्ठाधिकार का सिद्धांत और राजपूत राज्यों में उत्तराधिकार विवाद

ज्येष्ठाधिकार का सिद्धांत (Law of Primogeniture) प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत के विभिन्न हिन्दू राज्यों में उत्तराधिकार विवादों (Succession Disputes) का एक प्रमुख कारण यह था...

भाटी गोयन्ददास का मारवाड़ की राजनीति में महत्व

भाटी गोयन्ददास (गोविन्ददास) ने साधारण राजपूत परिवार में जन्म लिया किंतु अपनी स्वामिभक्ति, शौर्य एवं बुद्धि-चातुर्य के बल पर वह मारवाड़ राज्य (Princely State...

आमेट जागीर में उत्तराधिकार की समस्या और ब्रिटिश नीति

यह आलेख ब्रिटिश शासन काल में मेवाड़ राज्य की आमेट जागीर में हुए उत्तराधिकार संबंधी विवाद पर आधारित है जिसके माध्यम से यह समझने...

जोधपुरा उत्खनन: स्तर विन्यास और मृदभांड अनुक्रम

यह आलेख राजस्थान सरकार के पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग द्वारा जयपुर जिले के जोधपुरा नामक पुरास्थल पर किए गए उत्खनन के निष्कर्षों और उनके...

पश्चिमी मालवा का वर्धन राजवंश और राजस्थान की संप्रभुता

पश्चिमी मालवा का वर्धन राजवंश छठी शताब्दी ईस्वी के पूर्वार्ध में राजस्थान के इतिहास से जुड़ गया था। ऐसी स्थिति में राजस्थान के समक्ष...

दादूपंथ के पंचवाणी संग्रह

दादूपंथ के पंचवाणी संग्रह ठीक उसी प्रकार अनेक संतों, कवियों और भक्तों की वाणियाँ संग्रहीत हैं जिस प्रकार गुरुग्रंथ साहब में देखने को मिलती...

नाथ सम्प्रदाय का मारवाड़ की राजनीति में वर्चस्व

नाथ सम्प्रदाय का मारवाड़ की राजनीति में वर्चस्व उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वाद्ध की एक आश्चर्यजनक और महत्वपूर्ण घटना थी। राजपूताना की किसी अन्य रियासत...

वीसलदेव रासो: रासो काव्य परंपरा का अनूठा श्रृंगारिक रत्न

हिन्दी साहित्य के आदिकाल (वीरगाथा काल) में जहाँ एक ओर 'पृथ्वीराज रासो' जैसी रचनाएँ युद्ध और शौर्य के वर्णन से ओत-प्रोत थीं, वहीं नरपति...

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